तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जवाहर लाल ने कहा है की सेवानिवृत शिक्षक डॉ पवन कुमार सिंह बार-बार पेंशन मामले में गलत बयानबाजी कर रहे हैं। जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा की विश्वविद्यालय प्रशासन पर किसी व्यक्ति विशेष के बयान से कोई फर्क नहीं पड़ता है। कुलपति ने कहा की डॉ पवन सिंह ही सेवानिवृत शिक्षकों को गुमराह कर रहे हैं। पवन सिंह विश्वविद्यालय के विकास में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने कहा की विश्वविद्यालय का विकास सबों के सहयोग से ही संभव है। गलत बयानी से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है।
पीआरओ डॉ दीपक कुमार दिनकर ने कहा है की कुलपति के नेतृत्व में टीएमबीयू चतुर्दिक विकास कर रहा है। शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों में आमूल- चूल सुधार हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन को किसी के बयान से कोई असर नहीं पड़ने वाला है। सारा काम नियम परिनियम से हो रहा है।
पीआरओ ने कहा की जिस संघ के महासचिव का चोला ओढ़कर पवन कुमार सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, सबसे पहले उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए की एक सेवानिवृत शिक्षक कैसे संघ के अभी तक पदाधिकारी बने हुए हैं। उन्होंने कहा की डा पवन कुमार सिंह रिटायर्ड शिक्षकों के स्वयंभू नेता बने हुए हैं। उन्हें इतनी भी जानकारी नहीं है की विश्वविद्यालय में अधिकारी बनाने का क्या नियम है। कुलपति को यह अधिकार है की वे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए योग्य और दक्ष शिक्षक को अधिकारी के रूप में जिम्मेवारी देते हैं। पीआरओ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता और जनसंपर्क पदाधिकारी होते हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाले सभी बयान और सूचना जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से ही दी जाती है। पीआरओ के द्वारा प्रेस मीडिया में दिया गया बयान व्यक्तिगत नहीं होता है बल्कि उनका बयान आधिकारिक रूप से विश्विद्यालय प्रशासन का होता है।
डॉ दिनकर ने कहा की जो लोग खुद अपनी सेवा काल में कुछ नहीं कर पाए हैं, उन्हें बीपीएससी जैसे उच्च स्तरीय कमीशन से नियुक्त शिक्षक को अधिकारी बनने से ईर्ष्या हो रही है। अधिकारी योग्यता, दक्षता और कार्य के प्रति समर्पण को देखकर बनाए जाते हैं
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