बाँका। बाँका जिला के पाँचों विधानसभा क्षेत्रों में पहले चरण के 28 अक्टूबर 2020 को होने वाले मतदान के दिन जिला के अमूमन 08 से 10 हजार मतदाता अपना मतदान नहीं कर पाएंगे और यदि मतदान करने गए तो उनकी खैर नहीं, उन्हें सीधे जेल जाना पड़ जाएगा।
ज्ञात हो कि चुनाव के वक्त मुर्दे भी जिन्दा (सक्रिय)हो जाते हैं। पंचायत चुनाव हो या नगर परिषद का चुनाव, लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव, मतदान के वक्त मुर्दे भी सक्रिय हो जाते हैं। इसको रोकने में प्रशासन की केवल गलती है ऐसी भी बात नहीं है, इसमें कुछ गलती हमारी भी और कुछ गलती आपकी भी है।
कारण कि बूथ लेवल ऑफिसर (बी एल ओ) स्वतः संज्ञान लेकर किसी भी मृत व्यक्ति (मुर्दे) का नाम मतदाता सूची से नहीं हटा सकते। स्वजन या किसी के आवेदन पर ही नाम हटाने का प्रावधान है। जिसके कारण अभी भी बड़ी संख्या में मृत व्यक्ति (मुर्दे) का नाम मतदाता सूची में अंकित है। इसका फायदा बोगस वोट के रूप में संबंधित उम्मीदवार उठाते हैं। वर्षों पूर्व मर चुके नाना जी-दादा जी आदि का वोट भी संबंधित उम्मीदवारों को मिल जाता है। लेकिन इस मर्तबा यह संभव नहीं है। कारण कि चुनाव आयोग इस बार कुछ अधिक जागरूक नजर आ रही है। इसके लिए चुनाव आयोग ने इस मर्तबा मृत व्यक्ति (मुर्दे) के साथ ए एस डी (अब्सेंट स्विफ्ट डेथ) वोटरों की पुरी कुंडली तैयार कर रखी है। जो मतदान के वक्त प्रत्येक मतदान केन्द्र पर पीठासीन अधिकारी के पास इनकी सूची मौजूद रहेगी। इसलिए इस मर्तबा अगर मृत व्यक्ति (मुर्दे) के नाम पर कोई वोट डालने गया तो उसे लाल कोठी(जेल) जाना पड़ेगा। * के पी चौहान बाँका।

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